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Naat Lyrics in Hindi
कब्र से होती हुई खुल्द की क्यारी निकले
शहर ए तैयबा में अगर रूह हमारी निकले।
आए मैदान में जब गैरते ईमान के साथ
313 हज़ारों पे भी भारी निकले।
जाके पैदल मै अगर देखूं नबी का रोज़ा
एक पल में थकान सारी की सारी निकले।
कोई नज़रें न उठाएं सरे महशर उस दम
जिस घड़ी फातिमा ज़हरा की सवारी निकले।
